vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा
»
श्लोक 72
श्लोक
13.10.72
उपदेशो न कर्तव्य: कदाचिदपि कस्यचित्।
उपदेशाद्धि तत् पापं ब्राह्मण: समवाप्नुयात्॥ ७२॥
अनुवाद
ब्राह्मण को कभी किसी को उपदेश नहीं देना चाहिए, क्योंकि उपदेश देने से वह शिष्य के पापों को स्वयं अपने ऊपर ले लेता है। 72.
A brahmin should never preach to anyone, because by preaching he himself takes upon himself the sins of the disciple. 72.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×