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mahabharat 13.10.71: यहाँ धार्मिक, सदाचारी, सत्य और सरलता आदि गुणों से युक्त मनुष्य भी शास्त्रविरुद्ध अनुचित वचन कहने के कारण दुष्कर्मों के शिकार हो जाते हैं ॥71॥   |   mahabharat अध्याय 13.10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  13.10.71 
धार्मिका गुणसम्पन्ना: सत्यार्जवसमन्विता:।
दुरुक्तवाचाभिहितै: प्राप्नुवन्तीह दुष्कृतम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
यहाँ धार्मिक, सदाचारी, सत्य और सरलता आदि गुणों से युक्त मनुष्य भी शास्त्रविरुद्ध अनुचित वचन कहने के कारण दुष्कर्मों के शिकार हो जाते हैं ॥71॥
 
Even men who are religious, virtuous and endowed with truthfulness and simplicity etc. become victims of misdeeds here because of saying inappropriate words against the scriptures. 71॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)