श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  13.10.70 
तस्मान्मौनेन मुनयो दीक्षां कुर्वन्ति चादृता:।
दुरुक्तस्य भयाद् राजन् नाभाषन्ते च किंचन॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! इसीलिए तो साधु-संत मौन रहकर आदरपूर्वक दीक्षा देते हैं। वे इस भय से कोई भाषण नहीं देते कि कहीं उनके मुख से कोई अनुचित बात न निकल जाए।
 
King! That is why sages and saints respectfully give initiation in silence. They do not give any speech for fear that something inappropriate may come out of their mouth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)