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श्लोक  13.10.65 
दत्वा गाश्चैव विप्रेभ्य: पूतात्माभवदात्मवान्।
तमेव चाश्रमं गत्वा चचार विपुलं तप:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों को गौएँ दान करके वह बुद्धिमान ब्राह्मण शुद्ध अन्तःकरण वाला होकर उसी आश्रम में गया और वहाँ उसने महान तप किया।
 
After donating cows to the Brahmins, that wise Brahmin, having become pure in soul, went to the same ashram and performed great penance. 65.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)