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mahabharat 13.10.59: हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं इसीलिए आपकी हँसी उड़ा रहा हूँ। मैं आपका अनादर करने के लिए आपकी हँसी नहीं उड़ा रहा हूँ; क्योंकि आप मेरे गुरु हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.10.59 
एतस्मात् कारणाद् ब्रह्मन् प्रहसे त्वां द्विजोत्तम।
न त्वां परिभवन् ब्रह्मन् प्रहसामि गुरुर्भवान्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं इसीलिए आपकी हँसी उड़ा रहा हूँ। मैं आपका अनादर करने के लिए आपकी हँसी नहीं उड़ा रहा हूँ; क्योंकि आप मेरे गुरु हैं।
 
O best Brahmin! This is the reason why I laugh at you. I am not laughing at you to disrespect you; because you are my Guru.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)