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mahabharat 13.10.58: विप्रेन्द्र! यह काल का फेर तो देखो कि मैं शूद्र से राजा बना और मुझे उपदेश देने के कारण ही तुम्हें यह पुरस्कार मिला ॥58॥   |   mahabharat अध्याय 13.10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.10.58 
अहं राजा च विप्रेन्द्र पश्य कालस्य पर्ययम्।
मत्कृतस्योपदेशस्य त्वयावाप्तमिदं फलम्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
विप्रेन्द्र! यह काल का फेर तो देखो कि मैं शूद्र से राजा बना और मुझे उपदेश देने के कारण ही तुम्हें यह पुरस्कार मिला ॥58॥
 
Viprendra! Look at this twist of time that from a shudra I became a king and because of preaching to me you got this reward. ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)