पुरोहित उवाच
पुण्याहवाचने नित्यं धर्मकृत्येषु चासकृत्।
शान्तिहोमेषु च सदा किं त्वं हससि वीक्ष्य माम्॥ ५०॥
अनुवाद
पुरोहित ने कहा - महाराज ! आप प्रतिदिन पुण्याहवाचन के समय, बार-बार धार्मिक अनुष्ठान करते समय तथा शांतिहोम के अवसर पर मेरी ओर क्यों देखते और हंसते हैं ॥50॥
The priest said - Maharaj! Why do you look at me and laugh every day during the Punyahavachan and while performing religious rites repeatedly and on the occasions of Shanti-homa? ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥