श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.10.5 
निदर्शनमिदं राजन् शृणु मे भरतर्षभ।
दुरुक्तवचने राजन् यथापूर्वं युधिष्ठिर॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे भारतभूषण राजा युधिष्ठिर! इस विषय में एक दृष्टान्त सुनिए, जो दुःखी नीच जाति के मनुष्य को उपदेश देने से सम्बन्धित है॥5॥
 
Bharatbhushan King Yudhishthir! Listen to an illustration on this subject, which is related to giving advice to a low caste man who is in sorrow. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)