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mahabharat 13.10.48: पुरोहित ने कहा, "पृथ्वी के स्वामी! यदि आप प्रसन्न हैं, तो मुझे केवल एक ही वर चाहिए। सबसे पहले आप यह प्रतिज्ञा करें कि 'मैं इसे दूँगा।' इस विषय में सत्य बोलें, झूठ न बोलें ॥48॥   |   mahabharat अध्याय 13.10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.10.48 
पुरोहित उवाच
एकं वै वरमिच्छामि यदि तुष्टोऽसि पार्थिव।
प्रतिजानीहि तावत् त्वं सत्यं यद् वद नानृतम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
पुरोहित ने कहा, "पृथ्वी के स्वामी! यदि आप प्रसन्न हैं, तो मुझे केवल एक ही वर चाहिए। सबसे पहले आप यह प्रतिज्ञा करें कि 'मैं इसे दूँगा।' इस विषय में सत्य बोलें, झूठ न बोलें ॥48॥
 
The priest said, "Lord of the Earth! If you are pleased, I want only one boon. First of all, you should promise that 'I will give it.' Tell the truth in this matter, do not lie. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)