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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा  »  श्लोक 45-46
 
 
श्लोक  13.10.45-46 
ततोऽब्रवीन्नरेन्द्रं स पुरोधा भरतर्षभ॥ ४५॥
वरमिच्छाम्यहं त्वेकं त्वया दत्तं महाद्युते॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! तब पुरोहित ने राजा से इस प्रकार कहा - 'महान् राजन्! मैं आपसे वर प्राप्त करना चाहता हूँ।'
 
O best of the Bharatas! Then the priest spoke to the king thus - 'O mighty king! I wish to obtain a boon from you.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)