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mahabharat 13.10.31: "तुम इस कुशा की चटाई का अग्र भाग पूर्व दिशा की ओर कर दो और शुद्ध होकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाओ।" शूद्र ने वैसा ही किया जैसा ऋषि ने कहा था।   |   mahabharat अध्याय 13.10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.10.31 
कुरुष्वैतां पूर्वशीर्षां भवांश्चोदङ्मुख: शुचि:।
स च तत् कृतवान् शूद्र: सर्वं यदृषिरब्रवीत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
"तुम इस कुशा की चटाई का अग्र भाग पूर्व दिशा की ओर कर दो और शुद्ध होकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाओ।" शूद्र ने वैसा ही किया जैसा ऋषि ने कहा था।
 
"You turn the front part of this kusha mat towards the east and after purifying yourself sit facing north." The shudra did whatever the sage said.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)