Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.1.8: हे मनुष्यों के स्वामी! मैं राजा दुर्योधन के लिए यही उत्तम समझता हूँ कि उसकी मृत्यु ही सर्वोत्तम विकल्प हो, ताकि वह आपको इस अवस्था में पड़ा हुआ न देखे॥8॥ | mahabharat अध्याय 13.1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे मनुष्यों के स्वामी! मैं राजा दुर्योधन के लिए यही उत्तम समझता हूँ कि उसकी मृत्यु ही सर्वोत्तम विकल्प हो, ताकि वह आपको इस अवस्था में पड़ा हुआ न देखे॥8॥
O lord of men! I consider it best for king Duryodhana that his death should be the best option so that he does not see you lying in this state. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥