Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.1.78: गौतमी बोली, "शिकारी! न तो यह काल, न सर्प, न मृत्यु ही इसका कारण हैं। यह बालक अपने ही कर्मों से काल के द्वारा नष्ट होने के लिए प्रेरित हुआ है।" 78 | mahabharat अध्याय 13.1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गौतम्युवाच
नैव कालो न भुजगो न मृत्युरिह कारणम्।
स्वकर्मभिरयं बाल: कालेन निधनं गत:॥ ७८॥
अनुवाद
गौतमी बोली, "शिकारी! न तो यह काल, न सर्प, न मृत्यु ही इसका कारण हैं। यह बालक अपने ही कर्मों से काल के द्वारा नष्ट होने के लिए प्रेरित हुआ है।" 78
Gautami said, "Hunter! Neither this time, nor the snake, nor death are the causes here. This child has been driven by his own deeds to be destroyed by time." 78
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥