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mahabharat 13.1.77: हे मनुष्यों के स्वामी! जब काल ने ऐसा कहा, तब ब्राह्मणी गौतमी को विश्वास हो गया कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है। तब वह अर्जुन से बोली।   |   mahabharat अध्याय 13.1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.1.77 
तस्मिंस्तथा ब्रुवाणे तु ब्राह्मणी गौतमी नृप।
स्वकर्मप्रत्ययाँल्लोकान् मत्वार्जुनकमब्रवीत्॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जब काल ने ऐसा कहा, तब ब्राह्मणी गौतमी को विश्वास हो गया कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है। तब वह अर्जुन से बोली।
 
O Lord of men! When Kaal said this, the Brahmin Gautami was convinced that a man gets the fruits of his deeds. Then she spoke to Arjun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)