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mahabharat 13.1.72: इस बालक के कर्मों के कारण ही उसकी मृत्यु हुई है। उसके कर्म ही उसके विनाश का कारण हैं। हम सभी अपने-अपने कर्मों के अधीन हैं ॥ 72॥   |   mahabharat अध्याय 13.1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  13.1.72 
यदनेन कृतं कर्म तेनायं निधनं गत:।
विनाशहेतु: कर्मास्य सर्वे कर्मवशा वयम्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
इस बालक के कर्मों के कारण ही उसकी मृत्यु हुई है। उसके कर्म ही उसके विनाश का कारण हैं। हम सभी अपने-अपने कर्मों के अधीन हैं ॥ 72॥
 
The deeds of this child have resulted in his death. His deeds are the cause of his destruction. We all are subject to our deeds. ॥ 72॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)