Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.1.70: काल ने कहा- शिकारी! इस जीव की मृत्यु में न मैं दोषी हूँ, न यह मृत्यु, न यह सर्प। हम किसी की मृत्यु के लिए न तो उकसाने वाले हैं और न ही आयोजक। 70. | mahabharat अध्याय 13.1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
काल उवाच
न ह्यहं नाप्ययं मृत्युर्नायं लुब्धक पन्नग:।
किल्बिषी जन्तुमरणे न वयं हि प्रयोजका:॥ ७०॥
अनुवाद
काल ने कहा- शिकारी! इस जीव की मृत्यु में न मैं दोषी हूँ, न यह मृत्यु, न यह सर्प। हम किसी की मृत्यु के लिए न तो उकसाने वाले हैं और न ही आयोजक। 70.
Kaal said- Hunter! Neither I, nor this death, nor this snake are guilty in the death of this creature. We are not the instigators or the organizers of anyone's death. 70.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥