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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन
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श्लोक 67
श्लोक
13.1.67
मृत्युरुवाच
या काचिदेव चेष्टा स्यात् सर्वा कालप्रचोदिता।
पूर्वमेवैतदुक्तं हि मया लुब्धक कालत:॥ ६७॥
अनुवाद
मृत्यु ने कहा- शिकारी! इस संसार में जो भी कार्य हो रहा है, वह सब काल की प्रेरणा से हो रहा है। यह मैं तुम्हें पहले ही बता चुका हूँ।
Mrityu said- Hunter! Whatever action is happening in this world, it is all done with the inspiration of time. I have already told you this. 67.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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