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mahabharat 13.1.60: लेकिन मुझे किसी तरह अपने ऊपर लगे आरोपों का निपटारा करना ही होगा। ऐसा कहने का मेरा मकसद मौत के लिए ज़िम्मेदारी साबित करना नहीं है। 60.   |   mahabharat अध्याय 13.1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  13.1.60 
निर्मोक्षस्त्वस्य दोषस्य मया कार्या यथा तथा।
मृत्योरपि न दोष: स्यादिति मेऽत्र प्रयोजनम्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
लेकिन मुझे किसी तरह अपने ऊपर लगे आरोपों का निपटारा करना ही होगा। ऐसा कहने का मेरा मकसद मौत के लिए ज़िम्मेदारी साबित करना नहीं है। 60.
 
But I have to somehow resolve the charges against me. My intention in saying this is not to prove the blame for death. 60.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)