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mahabharat 13.1.39: भुजंगम! जो कोई अपराधी है, वह मेरे द्वारा मारा जाना है; पन्नग! तुम भी अपराधी हो; क्योंकि तुम स्वयं ही उसके वध का कारण बताते हो ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 13.1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  13.1.39 
किल्बिषी चापि मे वध्य: किल्बिषी चासि पन्नग।
आत्मानं कारणं ह्यत्र त्वमाख्यासि भुजङ्गम॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
भुजंगम! जो कोई अपराधी है, वह मेरे द्वारा मारा जाना है; पन्नग! तुम भी अपराधी हो; क्योंकि तुम स्वयं ही उसके वध का कारण बताते हो ॥39॥
 
Bhujangam! Whoever is a criminal, he is to be killed by me; Pannag! You are also a criminal; because you yourself tell yourself the reason for his killing. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)