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mahabharat 13.1.33: भीष्म कहते हैं - राजन! शिकारी के बार-बार आग्रह और उकसाने पर भी सौभाग्यवती गौतमी ने सर्प को मारने का विचार नहीं किया।   |   mahabharat अध्याय 13.1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.1.33 
भीष्म उवाच
असकृत् प्रोच्यमानापि गौतमी भुजगं प्रति।
लुब्धकेन महाभागा पापे नैवाकरोन्मतिम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - राजन! शिकारी के बार-बार आग्रह और उकसाने पर भी सौभाग्यवती गौतमी ने सर्प को मारने का विचार नहीं किया।
 
Bhishma says - King! Despite the hunter's repeated requests and provocations, the fortunate Gautami did not think of killing the snake.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)