Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.1.31: गौतमी बोली, "शिकारी! यह सत्य नहीं है कि इस साँप को मार देने से मेरा पुत्र पुनः जीवित हो जाएगा। मुझे इसे मारने में कोई अन्य लाभ नहीं दिखाई देता। अतः इस साँप को जीवित छोड़ दो।" | mahabharat अध्याय 13.1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गौतमी बोली, "शिकारी! यह सत्य नहीं है कि इस साँप को मार देने से मेरा पुत्र पुनः जीवित हो जाएगा। मुझे इसे मारने में कोई अन्य लाभ नहीं दिखाई देता। अतः इस साँप को जीवित छोड़ दो।"
Gautami said, "Hunter! It is not true that my son will regain his life if this snake is killed. I do not see any other benefit in killing it. Therefore, leave this snake alive."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥