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mahabharat 13.1.24: शिकारी बोला, "हे गुण-दोष जानने वाली देवी! मैं जानता हूँ कि बड़े-बड़े लोग किसी प्राणी को दुःखी देखकर इसी प्रकार दुःखी हो जाते हैं। किन्तु ये उपदेश स्वस्थ मनुष्य के लिए हैं (दुःखी मनुष्य के मन पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता)। अतः मैं इस नीच सर्प को अवश्य मार डालूँगा॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 13.1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.1.24 
लुब्धक उवाच
जानाम्यहं देवि गुणागुणज्ञे
सर्वार्तियुक्ता गुरवो भवन्ति।
स्वस्थस्यैते तूपदेशा भवन्ति
तस्मात् क्षुद्रं सर्पमेनं हनिष्ये॥ २४॥
 
 
अनुवाद
शिकारी बोला, "हे गुण-दोष जानने वाली देवी! मैं जानता हूँ कि बड़े-बड़े लोग किसी प्राणी को दुःखी देखकर इसी प्रकार दुःखी हो जाते हैं। किन्तु ये उपदेश स्वस्थ मनुष्य के लिए हैं (दुःखी मनुष्य के मन पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता)। अतः मैं इस नीच सर्प को अवश्य मार डालूँगा॥ 24॥
 
The hunter said, "O Goddess who knows the virtues and vices! I know that elders become sad like this on seeing any creature in pain. But these advices are for a healthy person (they have no effect on the mind of a sad person). Hence, I will surely kill this vile snake.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)