Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.1.21: गौतमी बोलीं, "अर्जुनक! इस सर्प को छोड़ दो। तुम अभी अपरिपक्व हो। तुम्हें इस सर्प को नहीं मारना चाहिए। होनहार व्यक्ति को कोई नहीं टाल सकता। यह जानते हुए भी कौन इसकी उपेक्षा करके अपने ऊपर पाप का भारी बोझ लाएगा?" | mahabharat अध्याय 13.1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गौतम्युवाच
विसृजैनमबुद्धिस्त्वमवध्योऽर्जुनक त्वया।
को ह्यात्मानं गुरुं कुर्यात् प्राप्तव्यमविचिन्तयन्॥ २१॥
अनुवाद
गौतमी बोलीं, "अर्जुनक! इस सर्प को छोड़ दो। तुम अभी अपरिपक्व हो। तुम्हें इस सर्प को नहीं मारना चाहिए। होनहार व्यक्ति को कोई नहीं टाल सकता। यह जानते हुए भी कौन इसकी उपेक्षा करके अपने ऊपर पाप का भारी बोझ लाएगा?"
Gautami said, "Arjunak, leave this snake. You are still immature. You should not kill this snake. No one can avoid a promising person. Knowing this, who will ignore it and bring a heavy burden of sin upon himself?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥