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mahabharat 13.1.19: वह उसे ले आया और बोला, 'महाभाग्य! यह वही नीच सर्प है जिसने तुम्हारे पुत्र को मार डाला है। शीघ्र बताओ, मैं इसे कैसे मारूँ?॥19॥   |   mahabharat अध्याय 13.1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.1.19 
स चाब्रवीदयं ते स पुत्रहा पन्नगाधम:।
ब्रूहि क्षिप्रं महाभागे वध्यतां केन हेतुना॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वह उसे ले आया और बोला, 'महाभाग्य! यह वही नीच सर्प है जिसने तुम्हारे पुत्र को मार डाला है। शीघ्र बताओ, मैं इसे कैसे मारूँ?॥19॥
 
He brought it and said, 'Mahabhagya! This is the vile snake that has killed your son. Tell me quickly, how should I kill it?॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)