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mahabharat 13.1.18: इसी बीच अर्जुनक नामक एक शिकारी ने ईर्ष्यावश रस्सी से साँप को पकड़ लिया और गौतमी के पास ले आया।   |   mahabharat अध्याय 13.1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.1.18 
अथ तं स्नायुपाशेन बद्‍ध्वा सर्पममर्षित:।
लुब्धकोऽर्जुनको नाम गौतम्या: समुपानयत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इसी बीच अर्जुनक नामक एक शिकारी ने ईर्ष्यावश रस्सी से साँप को पकड़ लिया और गौतमी के पास ले आया।
 
Meanwhile a hunter named Arjunak caught the snake with a rope and out of jealousy brought it to Gautami.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)