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mahabharat 13.1.10: क्षत्रिय धर्म के अनुसार लड़े गए इस युद्ध में दुष्टबुद्धि और दुष्ट दुर्योधन अपनी सेना और बन्धु-बान्धवों सहित मारा गया ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 13.1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरको सान्त्वना देनेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.1.10 
दुर्योधनो हि समरे सहसैन्य: सहानुज:।
निहत: क्षत्रधर्मेऽस्मिन् दुरात्मा कुलपांसन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रिय धर्म के अनुसार लड़े गए इस युद्ध में दुष्टबुद्धि और दुष्ट दुर्योधन अपनी सेना और बन्धु-बान्धवों सहित मारा गया ॥10॥
 
The evil-minded and wicked Duryodhana was killed along with his army and relatives in this war fought according to the Kshatriya Dharma. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)