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mahabharat 12.99.7-8: ‘वीर योद्धाओं का त्याग ही उन्हें स्वर्ग के उत्तम द्वार की प्राप्ति का मुख्य कारण है।’ शत्रुनगरी के विजेता युधिष्ठिर! राजा जनक के ऐसा कहने पर उन योद्धाओं ने युद्धस्थल में अपने राजा का आनन्द बढ़ाया और उनके शत्रुओं को जीत लिया; अतः वीर योद्धा को युद्धस्थल में सदैव डटे रहना चाहिए।॥ 7-8॥   |   mahabharat अध्याय 12.99: शूरवीरोंको स्वर्ग और कायरोंको नरककी प्राप्तिके विषयमें मिथिलेश्वर जनकका इतिहास   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.99.7-8 
त्यागमूलं हि शूराणां स्वर्गद्वारमनुत्तमम्।
इत्युक्तास्ते नृपतिना योधा: परपुरंजय॥ ७॥
अजयन्त रणे शत्रून् हर्षयन्तो नरेश्वरम्।
तस्मादात्मवता नित्यं स्थातव्यं रणमूर्धनि॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘वीर योद्धाओं का त्याग ही उन्हें स्वर्ग के उत्तम द्वार की प्राप्ति का मुख्य कारण है।’ शत्रुनगरी के विजेता युधिष्ठिर! राजा जनक के ऐसा कहने पर उन योद्धाओं ने युद्धस्थल में अपने राजा का आनन्द बढ़ाया और उनके शत्रुओं को जीत लिया; अतः वीर योद्धा को युद्धस्थल में सदैव डटे रहना चाहिए।॥ 7-8॥
 
‘The sacrifice of the valiant warriors is the main reason behind their attainment of the best gate of heaven.’ Yudhishthira, the conqueror of the enemy city! When King Janaka said this, those warriors increased the joy of their king on the battlefield and conquered his enemies; hence, a brave warrior should always remain firm at the battlefront.॥ 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)