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mahabharat 12.99.6: स्वर्ग और नरक दोनों लोकों को देखकर, प्राण त्यागने और शत्रुओं पर विजय पाने के दृढ़ निश्चय के साथ युद्ध में डटे रहो। उस नरक में मत जाओ, जिसकी कहीं कोई प्रतिष्ठा नहीं है॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.99: शूरवीरोंको स्वर्ग और कायरोंको नरककी प्राप्तिके विषयमें मिथिलेश्वर जनकका इतिहास   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.99.6 
तान् दृष्ट्वारीन् विजयत भूत्वा संत्यागबुद्धय:।
नरकस्याप्रतिष्ठस्य मा भूत वशवर्तिन:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ग और नरक दोनों लोकों को देखकर, प्राण त्यागने और शत्रुओं पर विजय पाने के दृढ़ निश्चय के साथ युद्ध में डटे रहो। उस नरक में मत जाओ, जिसकी कहीं कोई प्रतिष्ठा नहीं है॥6॥
 
'After seeing both the heavenly and hellish realms, you must stand firm in the battle with determination to sacrifice your life and conquer your enemies. Do not submit yourself to that hell which has no prestige anywhere.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)