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mahabharat 12.99.2: युधिष्ठिर! सुनो, मिथिला के राजा जनक ने यज्ञोपवीत धारण करके युद्धभूमि में अपने योद्धाओं का किस प्रकार उत्साहवर्धन किया।   |   mahabharat अध्याय 12.99: शूरवीरोंको स्वर्ग और कायरोंको नरककी प्राप्तिके विषयमें मिथिलेश्वर जनकका इतिहास   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.99.2 
यज्ञोपवीती संग्रामे जनको मैथिलो यथा।
योधानुद्धर्षयामास तन्निबोध युधिष्ठिर॥ २॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! सुनो, मिथिला के राजा जनक ने यज्ञोपवीत धारण करके युद्धभूमि में अपने योद्धाओं का किस प्रकार उत्साहवर्धन किया।
 
Yudhishthira! Listen to the way the king of Mithila, Janaka, who wore the sacred thread, encouraged his warriors on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)