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mahabharat 12.99.18: तीनों लोकों में वीरता से बढ़कर कोई वस्तु नहीं है। वीर पुरुष सबकी रक्षा करता है और सारा जगत उसी के सहारे टिका रहता है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.99: शूरवीरोंको स्वर्ग और कायरोंको नरककी प्राप्तिके विषयमें मिथिलेश्वर जनकका इतिहास   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.99.18 
न हि शौर्यात् परं किंचित् त्रिषु लोकेषु विद्यते।
शूर: सर्वं पालयति सर्वं शूरे प्रतिष्ठितम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तीनों लोकों में वीरता से बढ़कर कोई वस्तु नहीं है। वीर पुरुष सबकी रक्षा करता है और सारा जगत उसी के सहारे टिका रहता है॥18॥
 
There is nothing greater than bravery in the three worlds. A brave man protects everyone and the whole world rests on his support.॥ 18॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि विजिगीषमाणवृत्ते नवनवतितमोऽध्याय:॥ ९९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें विजयाभिलाषी राजाका बर्तावविषयक निन्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)