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mahabharat 12.99.15: चराचर प्राणियों का आहार स्थिर प्राणियों का आहार है, दाँत वाले प्राणियों का आहार दंतहीन प्राणियों का आहार है, प्यासे का आहार जल है और वीर का आहार कायरों का आहार है ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.99: शूरवीरोंको स्वर्ग और कायरोंको नरककी प्राप्तिके विषयमें मिथिलेश्वर जनकका इतिहास   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.99.15 
चराणामचरा ह्यन्नमदंष्ट्रा दंष्ट्रिणामपि।
आप: पिपासतामन्नमन्नं शूरस्य कातरा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
चराचर प्राणियों का आहार स्थिर प्राणियों का आहार है, दाँत वाले प्राणियों का आहार दंतहीन प्राणियों का आहार है, प्यासे का आहार जल है और वीर का आहार कायरों का आहार है ॥15॥
 
The food of moving creatures is that of the stationary creatures, the food of having teeth is that of the toothless creatures, the food of the thirsty is water and the food of the brave is that of the cowards. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)