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mahabharat 12.99.13: राजा! जो लोग जीवन से निराश होकर पुनः युद्ध करने के लिए लौटते हैं, उनकी गति अत्यन्त असहनीय होती है; अतः भागने वाले का पीछा नहीं करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.99: शूरवीरोंको स्वर्ग और कायरोंको नरककी प्राप्तिके विषयमें मिथिलेश्वर जनकका इतिहास   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.99.13 
पुनरावर्तमानानां निराशानां च जीविते।
वेग: सुदु:सहो राजंस्तस्मान्नात्यनुसारयेत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राजा! जो लोग जीवन से निराश होकर पुनः युद्ध करने के लिए लौटते हैं, उनकी गति अत्यन्त असहनीय होती है; अतः भागने वाले का पीछा नहीं करना चाहिए।
 
King! Those who despair of life and return to fight again, their speed is extremely unbearable; therefore one should not chase those who are running away.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)