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mahabharat 12.99.11: सभी क्षत्रिय महायुद्ध द्वारा स्वर्ग प्राप्ति की इच्छा रखते हैं; इसलिए जैसे मगरमच्छ समुद्र में उथल-पुथल मचा देता है, वैसे ही वे अत्यन्त क्रोधित होकर शत्रु सेना में उथल-पुथल मचा देते हैं ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.99: शूरवीरोंको स्वर्ग और कायरोंको नरककी प्राप्तिके विषयमें मिथिलेश्वर जनकका इतिहास   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.99.11 
सर्वे स्वर्गतिमिच्छन्ति सुयुद्धेनातिमन्यव:।
क्षोभयेयुरनीकानि सागरं मकरा यथा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सभी क्षत्रिय महायुद्ध द्वारा स्वर्ग प्राप्ति की इच्छा रखते हैं; इसलिए जैसे मगरमच्छ समुद्र में उथल-पुथल मचा देता है, वैसे ही वे अत्यन्त क्रोधित होकर शत्रु सेना में उथल-पुथल मचा देते हैं ॥11॥
 
All Kshatriyas desire to attain heaven through a great war; therefore, just as a crocodile causes turmoil in the ocean, in the same way they become extremely angry and create turmoil in the enemy forces. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)