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mahabharat 12.98.d8: और जाते समय उन्होंने कहा, 'राक्षसों की सेना को पराजित किए बिना तथा उनके द्वारा बंदी बनाए गए लोगों और सैनिकों को छुड़ाए बिना यहां वापस मत आना।'   |   mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  12.98.d8 
नाजित्वा राक्षसीं सेनां पुनरागमनं तव॥
बन्दीमोक्षमकृत्वा च न चागमनमिष्यते।
 
 
अनुवाद
और जाते समय उन्होंने कहा, 'राक्षसों की सेना को पराजित किए बिना तथा उनके द्वारा बंदी बनाए गए लोगों और सैनिकों को छुड़ाए बिना यहां वापस मत आना।'
 
And while leaving he said, 'Do not return here without defeating the army of demons and rescuing the people and soldiers held captive by them.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)