श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  12.98.d7 
श्रुत्वा तेषां वचो भूय: सोपधं वसुधाधिप।
सर्वसैन्यसमायुक्त: सुदेव: प्रेरितस्त्वया॥
राक्षसानां वधार्थाय दुर्जयानां नराधिप।
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! हे मनुष्यों के स्वामी! तब उन्हीं मन्त्रियों के कपटपूर्ण वचन सुनकर आपने सुदेव को अपनी सेना सहित उन अजेय दैत्यों का वध करने के लिए युद्ध करने की आज्ञा दी।
 
Prithvinath! O Lord of men! Then after listening to the deceitful words of those same ministers, you ordered Sudeva to go to war with his army to kill those invincible demons.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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