श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक d6
 
 
श्लोक  12.98.d6 
निराकृतस्त्वया चासीत् सुदेव: सैन्यनायक:।
तत्रामात्यवच: श्रुत्वा निरस्त: सर्वकर्मसु॥
 
 
अनुवाद
उन दिनों आपने सेनापति के विरुद्ध मंत्री के वचन सुनकर सेनापति सुदेव को उसके अधिकार से वंचित कर दिया था तथा उसे सभी कार्यों से पृथक कर दिया था।
 
In those days, after listening to the minister's words against the commander-in-chief, you had deprived commander Sudeva of his authority and separated him from all tasks.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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