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mahabharat 12.98.d2-d3: महीपाल! उन दिनों तुम्हारे तीन शत्रु थे - संयम, संयम और महाबली सुयम। ये सभी तुम्हें हानि पहुँचाने का प्रयत्न कर रहे थे। ये शतश्रृंग नामक राक्षस के पुत्र थे। संसार में किसी के लिए भी उन तीनों भयंकर राक्षसों को पराजित करना कठिन था। सुदेव ने उन सभी को परास्त कर दिया था।   |   mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.98.d2-d3 
शत्रवो निर्जिता: सर्वे ये तवाहितकारिण:॥
संयमो वियमश्चैव सुयमश्च महाबल:।
राक्षसा दुर्जया लोके त्रयस्ते युद्धदुर्मदा:।
पुत्रास्ते शतशृङ्गस्य राक्षसस्य महीपते॥
 
 
अनुवाद
महीपाल! उन दिनों तुम्हारे तीन शत्रु थे - संयम, संयम और महाबली सुयम। ये सभी तुम्हें हानि पहुँचाने का प्रयत्न कर रहे थे। ये शतश्रृंग नामक राक्षस के पुत्र थे। संसार में किसी के लिए भी उन तीनों भयंकर राक्षसों को पराजित करना कठिन था। सुदेव ने उन सभी को परास्त कर दिया था।
 
Mahipal! In those days you had three enemies-Sanyam, Viyam and the mighty Suyam. All of them were trying to harm you. They were the sons of a demon named Shatashringa. It was difficult for anyone in the world to defeat those three fierce demons. Sudeva had defeated them all.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)