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mahabharat 12.98.d15: प्रार्थना करके उसने तलवार हाथ में ली और अपना सिर काटने को तैयार हुआ। तब देवाधिदेव महादेव ने दया करके तलवार सहित सुदेव का दाहिना हाथ पकड़ लिया और उसकी ओर स्नेहपूर्वक देखकर यह कहा।   |   mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक d15
 
 
श्लोक  12.98.d15 
स्तुत्वा शस्त्रं समादाय स्वशिरश्छेत्तुमुद्यत:।
कारुण्याद् देवदेवेन गृहीतस्तस्य दक्षिण:॥
सपाणि: सह शस्त्रेण दृष्ट्वा चेदमुवाच ह।
 
 
अनुवाद
प्रार्थना करके उसने तलवार हाथ में ली और अपना सिर काटने को तैयार हुआ। तब देवाधिदेव महादेव ने दया करके तलवार सहित सुदेव का दाहिना हाथ पकड़ लिया और उसकी ओर स्नेहपूर्वक देखकर यह कहा।
 
After praying, he took the sword in his hand and prepared to cut off his head. Then the lord of gods Mahadev, out of compassion, held Sudev's right hand along with the sword and looking at him affectionately said this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)