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mahabharat 12.98.7: मैंने कठोर ब्रह्मचर्य का पालन किया, अपने गुरु द्वारा बताए गए आचरण का पालन किया और अपने गुरु की सेवा करके, मैंने धार्मिक रूप से वेदों का अध्ययन किया और राजनीति विज्ञान में विशेष शिक्षा प्राप्त की।   |   mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.98.7 
ब्रह्मचर्येण घोरेण गुर्वाचारेण सेवया।
वेदानधीत्य धर्मेण राजशास्त्रं च केवलम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मैंने कठोर ब्रह्मचर्य का पालन किया, अपने गुरु द्वारा बताए गए आचरण का पालन किया और अपने गुरु की सेवा करके, मैंने धार्मिक रूप से वेदों का अध्ययन किया और राजनीति विज्ञान में विशेष शिक्षा प्राप्त की।
 
I observed strict celibacy, followed the conduct prescribed by my Guru and by serving my Guru, I religiously studied the Vedas and acquired special education in political science.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)