Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.98.51: भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! इन्द्र के ये वचन सुनकर राजा अम्बरीष ने उन्हें हृदय में स्वीकार कर लिया और यह विश्वास किया कि योद्धाओं को स्वतः ही सफलता प्राप्त हो जाती है। 51. | mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! इन्द्र के ये वचन सुनकर राजा अम्बरीष ने उन्हें हृदय में स्वीकार कर लिया और यह विश्वास किया कि योद्धाओं को स्वतः ही सफलता प्राप्त हो जाती है। 51.
Bhishma says - Yudhishthira! On hearing these words of Indra, King Ambrish accepted them in his heart and believed that warriors automatically attain success. 51.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि इन्द्राम्बरीषसंवादे अष्टनवतितमोऽध्याय:॥ ९८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें इन्द्र और अम्बरीषका संवादविषयक अट्ठानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९८॥
(दाक्षिणत्य अधिक पाठके २३ १/२ श्लोक मिलाकर कुछ ७४ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥