Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.98.49-50: जम्भ, वृत्रासुर, बलासुर, पाकसुर, सैकड़ों माया जानने वाले विरोचन, वीर नमुचि, नाना प्रकार की मायाओं के स्वामी शम्बरासुर, दैत्यवंशी विप्रचित्ति, सम्पूर्ण दैत्य समूह और प्रह्लाद को भी मारकर मैं देवताओं के राजा पद पर प्रतिष्ठित हुआ हूँ ॥49-50॥ | mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जम्भं वृत्रं बलं पाकं शतमायं विरोचनम्॥ ४९॥
दुर्वार्यं चैव नमुचिं नैकमायं च शम्बरम्।
विप्रचित्तिं च दैतेयं दनो: पुत्रांश्च सर्वश:।
प्रह्रादं च निहत्याजौ ततो देवाधिपोऽभवम्॥ ५०॥
अनुवाद
जम्भ, वृत्रासुर, बलासुर, पाकसुर, सैकड़ों माया जानने वाले विरोचन, वीर नमुचि, नाना प्रकार की मायाओं के स्वामी शम्बरासुर, दैत्यवंशी विप्रचित्ति, सम्पूर्ण दैत्य समूह और प्रह्लाद को भी मारकर मैं देवताओं के राजा पद पर प्रतिष्ठित हुआ हूँ ॥49-50॥
By killing Jambha, Vritrasura, Balasur, Pakasura, Virochana who knows hundreds of Maya, the brave Namuchi, Shambarasura who is the master of various illusions, Viprachitti of the demon dynasty, the entire demon group and Prahlad too, I have been established in the position of the king of Gods. 49-50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥