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mahabharat 12.98.48-49h: युद्ध में वृद्ध, बालक और स्त्रियों को नहीं मारना चाहिए। भागते हुए मनुष्य की पीठ पर वार नहीं करना चाहिए। जो मुँह में तिनका लेकर आपकी शरण में आए और कहे कि मैं आपका हूँ, उसे भी नहीं मारना चाहिए। ॥48 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  12.98.48-49h 
वृद्धबालौ न हन्तव्यौ न च स्त्री नैव पृष्ठत:॥ ४८॥
तृणपूर्णमुखश्चैव तवास्मीति च यो वदेत्।
 
 
अनुवाद
युद्ध में वृद्ध, बालक और स्त्रियों को नहीं मारना चाहिए। भागते हुए मनुष्य की पीठ पर वार नहीं करना चाहिए। जो मुँह में तिनका लेकर आपकी शरण में आए और कहे कि मैं आपका हूँ, उसे भी नहीं मारना चाहिए। ॥48 1/2॥
 
In war one should not kill old people, children and women. One should not attack the back of a fleeing person. One who comes to you for shelter with a straw in his mouth and says that he is yours should also not be killed. ॥ 48 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)