श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  12.98.46-47h 
वराप्सर:सहस्राणि शूरमायोधने हतम्॥ ४६॥
त्वरमाणाभिधावन्ति मम भर्ता भवेदिति।
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में मारे गए योद्धा की ओर हजारों सुंदर अप्सराएं उत्सुकता से दौड़ती हैं, इस आशा से कि वह उनका पति बन जाएगा। 46 1/2
 
Thousands of beautiful Apsaras eagerly run towards the slain warrior on the battlefield with the hope that he may become their husband. 46 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)