Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.98.44-45h: युद्धभूमि में मारे गए योद्धा के लिए किसी भी प्रकार शोक नहीं करना चाहिए। वह मारा गया योद्धा स्वर्ग में सम्मान प्राप्त करता है, इसलिए उसके लिए कभी शोक नहीं करना चाहिए ॥44 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आहवे तु हतं शूरं न शोचेत कथंचन॥ ४४॥
अशोच्यो हि हत: शूर: स्वर्गलोके महीयते।
अनुवाद
युद्धभूमि में मारे गए योद्धा के लिए किसी भी प्रकार शोक नहीं करना चाहिए। वह मारा गया योद्धा स्वर्ग में सम्मान प्राप्त करता है, इसलिए उसके लिए कभी शोक नहीं करना चाहिए ॥44 1/2॥
One should not mourn in any way for a warrior killed on the battlefield. That slain warrior attains respect in heaven, hence he is never to be mourned. ॥ 44 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥