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mahabharat 12.98.41-42h: जिस वीर योद्धा के रक्त से बाल, मांस और हड्डियों से भरी हुई यज्ञवेदी भर जाती है, वह परम मोक्ष को प्राप्त होता है ॥41 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  12.98.41-42h 
यस्य शोणितवेगेन वेदि: स्यात् सम्परिप्लुता॥ ४१॥
केशमांसास्थिसम्पूर्णा स गच्छेत् परमां गतिम्।
 
 
अनुवाद
जिस वीर योद्धा के रक्त से बाल, मांस और हड्डियों से भरी हुई यज्ञवेदी भर जाती है, वह परम मोक्ष को प्राप्त होता है ॥41 1/2॥
 
The valiant warrior whose blood floods the sacrificial altar filled with hair, flesh and bones, attains the ultimate salvation. ॥ 41 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)