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mahabharat 12.98.4-5: वह एक अत्यंत तेजस्वी, दिव्य एवं उत्कृष्ट विमान पर बैठकर बहुत ऊपर उड़ रहा था। अपने पराक्रमी सेनापति को अपने से भी ऊपर जाते देख तथा सुदेव की समृद्धि देखकर दानवीर राजा अम्बरीष आश्चर्यचकित हो गए और उन्होंने इन्द्र से कहा।   |   mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  12.98.4-5 
सर्वतेजोमयं दिव्यं विमानवरमास्थितम्।
उपर्युपरि गच्छन्तं स्वं वै सेनापतिं प्रभुम्॥ ४॥
स दृष्ट्वोपरि गच्छन्तं सेनापतिमुदारधी:।
ऋद्धिं दृष्ट्वा सुदेवस्य विस्मित: प्राह वासवम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वह एक अत्यंत तेजस्वी, दिव्य एवं उत्कृष्ट विमान पर बैठकर बहुत ऊपर उड़ रहा था। अपने पराक्रमी सेनापति को अपने से भी ऊपर जाते देख तथा सुदेव की समृद्धि देखकर दानवीर राजा अम्बरीष आश्चर्यचकित हो गए और उन्होंने इन्द्र से कहा।
 
He was flying high and high sitting on a completely brilliant, divine and excellent plane. Seeing his powerful commander going higher than himself and seeing the prosperity of Sudeva, the generous-minded King Ambrish was astonished and spoke to Lord Indra. 4-5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)