Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.98.39-40h: जब अपनी सेना और शत्रु सेना एक दूसरे के सामने पंक्तिबद्ध होकर खड़ी हो, तब जिसके सामने केवल शून्य आकाश रह जाए, वह शून्य आकाश ही उस वीर के लिए युद्ध यज्ञ की वेदी है। मानो उस स्थान पर सदैव यज्ञ चलता रहता है और तीनों वेद तथा तीन प्रकार की अग्नियाँ वहाँ सदैव स्थापित रहती हैं। | mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब अपनी सेना और शत्रु सेना एक दूसरे के सामने पंक्तिबद्ध होकर खड़ी हो, तब जिसके सामने केवल शून्य आकाश रह जाए, वह शून्य आकाश ही उस वीर के लिए युद्ध यज्ञ की वेदी है। मानो उस स्थान पर सदैव यज्ञ चलता रहता है और तीनों वेद तथा तीन प्रकार की अग्नियाँ वहाँ सदैव स्थापित रहती हैं।
When your army and the enemy army are in formation in front of each other, then whoever is left with only empty sky in front of him, that empty sky itself is the altar of the war sacrifice for that brave man. It is as if a sacrifice is always going on at that place and the three Vedas and the three types of fire are always established there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥