Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.98.38-39h: जिस योद्धा के लिए दक्षिण दिशा में स्थित योद्धा उसके गण हैं, उत्तर दिशा में स्थित योद्धा आग्नीघ्र (ऋत्विक) हैं और शत्रु सेना उसकी पत्नीरूप है, उसके लिए समस्त पुण्य लोक दूर नहीं हैं ॥38 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सदस्या दक्षिणा योधा आग्नीध्रश्चोत्तरां दिशम्॥ ३८॥
शत्रुसेनाकलत्रस्य सर्वलोका न दूरत:।
अनुवाद
जिस योद्धा के लिए दक्षिण दिशा में स्थित योद्धा उसके गण हैं, उत्तर दिशा में स्थित योद्धा आग्नीघ्र (ऋत्विक) हैं और शत्रु सेना उसकी पत्नीरूप है, उसके लिए समस्त पुण्य लोक दूर नहीं हैं ॥38 1/2॥
For the warrior for whom the warriors situated in the south direction are his members, the warriors in the north direction are Agnidhra (Ritvik) and the enemy army is in the form of his wife, for him all the virtuous worlds are not far away. 38 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥