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mahabharat 12.98.31-36h: जिस योद्धा के युद्धरूपी यज्ञ में रक्त की नदी बहती है, उसके लिए उस पवित्र जल में स्नान करना उतना ही पुण्यदायी है जितना कि पवित्र जल में स्नान करना। उस नदी का जल रक्त है, ढोल मेंढक और कछुए के समान हैं, वीरों की हड्डियाँ छोटे-छोटे कंकड़ और रेत के समान हैं, उसमें प्रवेश करना बहुत कठिन है, मांस और रक्त उस नदी की कीचड़ हैं, ढाल और तलवारें उसमें नावों के समान हैं, वह भयानक नदी बाल के समान सेव और घास से ढकी हुई है। मारे गए घोड़े, हाथी और रथ उसमें उतरने की सीढ़ियाँ हैं, ध्वजाएँ और पताकाएँ किनारों पर लगे बाँस की लताओं के समान हैं, वह मारे गए हाथियों को भी बहा ले जाती है, वह रक्त के समान लाल जल से लबालब भरी हुई है, उसे पार करने की इच्छा रखने वाले मनुष्यों के लिए उसे पार करना अत्यंत कठिन है, मरे हुए हाथी बड़े मगरमच्छों के समान हैं, परलोक की ओर बहने वाली नदी अशुभ प्रतीत होती है, भाला और तलवार उसे पार करने के लिए विशाल नौकाओं के समान हैं। गिद्ध, कंकर और कौवे छोटी नावों के समान हैं, राक्षस इसके चारों ओर घूमते हैं और यह डरपोक मनुष्यों को मोहित कर लेती है।   |   mahabharat अध्याय 12.98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 31-36h
 
 
श्लोक  12.98.31-36h 
यस्य शोणितसंघाता भेरीमण्डूककच्छपा॥ ३१॥
वीरास्थिशर्करा दुर्गा मांसशोणितकर्दमा।
असिचर्मप्लवा घोरा केशशैवलशाद्वला॥ ३२॥
अश्वनागरथैश्चैव संच्छिन्नै: कृतसंक्रमा।
पताकाध्वजवानीरा हतवारणवाहिनी॥ ३३॥
शोणितोदा सुसम्पूर्णा दुस्तरा पारगैर्नरै:।
हतनागमहानक्रा परलोकवहाशिवा॥ ३४॥
ऋष्टिखड्गमहानौका गृध्रकङ्कबलप्लवा।
पुरुषादानुचरिता भीरूणां कश्मलावहा॥ ३५॥
नदी योधस्य संग्रामे तदस्यावभृथं स्मृतम्।
 
 
अनुवाद
जिस योद्धा के युद्धरूपी यज्ञ में रक्त की नदी बहती है, उसके लिए उस पवित्र जल में स्नान करना उतना ही पुण्यदायी है जितना कि पवित्र जल में स्नान करना। उस नदी का जल रक्त है, ढोल मेंढक और कछुए के समान हैं, वीरों की हड्डियाँ छोटे-छोटे कंकड़ और रेत के समान हैं, उसमें प्रवेश करना बहुत कठिन है, मांस और रक्त उस नदी की कीचड़ हैं, ढाल और तलवारें उसमें नावों के समान हैं, वह भयानक नदी बाल के समान सेव और घास से ढकी हुई है। मारे गए घोड़े, हाथी और रथ उसमें उतरने की सीढ़ियाँ हैं, ध्वजाएँ और पताकाएँ किनारों पर लगे बाँस की लताओं के समान हैं, वह मारे गए हाथियों को भी बहा ले जाती है, वह रक्त के समान लाल जल से लबालब भरी हुई है, उसे पार करने की इच्छा रखने वाले मनुष्यों के लिए उसे पार करना अत्यंत कठिन है, मरे हुए हाथी बड़े मगरमच्छों के समान हैं, परलोक की ओर बहने वाली नदी अशुभ प्रतीत होती है, भाला और तलवार उसे पार करने के लिए विशाल नौकाओं के समान हैं। गिद्ध, कंकर और कौवे छोटी नावों के समान हैं, राक्षस इसके चारों ओर घूमते हैं और यह डरपोक मनुष्यों को मोहित कर लेती है।
 
For the warrior in whose sacrifice of war a river of blood flows, it is as meritorious as taking a bath in the holy water. Blood is the water of that river, drums are like frogs and turtles, the bones of the brave are like small pebbles and sand, it is very difficult to enter it, flesh and blood are the mud of that river, shields and swords are like boats in it, that terrible river is covered with hair-like seva and grass. Slaughtered horses, elephants and chariots are the steps to descend into it, flags and banners are like creepers of bamboos on the banks, it carries away even the slain elephants, it is filled to the brim with blood-red water, it is extremely difficult for men who wish to cross it, dead elephants are like big crocodiles, the river flowing towards the other world appears ominous, the spear and the sword are like huge boats to cross it. Vultures, pebbles and crows are like small boats, demons roam around it and it bewitches timid men.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)