श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 98: इन्द्र और अम्बरीषके संवादमें नदी और यज्ञके रूपकोंका वर्णन तथा समरभूमिमें जूझते हुए मारे जानेवाले शूरवीरोंको उत्तम लोकोंकी प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.98.3 
अम्बरीषो हि नाभागि: स्वर्गं गत्वा सुदुर्लभम्।
ददर्श सुरलोकस्थं शक्रेण सचिवं सह॥ ३॥
 
 
अनुवाद
नाभाग के पुत्र अम्बरीष ने बहुत ही कम समय में स्वर्गलोक में जाकर देखा कि उनका सेनापति देवलोक में इन्द्र के साथ बैठा हुआ है॥3॥
 
Nabhaga's son Ambarish went to heaven very rarely and saw that his commander was sitting with Indra in the world of gods. 3॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas